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यहाँ सात हर किलोमीटर पर है विन्सर महादेव
August 11, 2020 • Aankhen crime par • उत्तराखण्ड

यहाँ सात हर किलोमीटर पर है विन्सर महादेव
रिपोर्ट केशर सिंह नेगी

 


उत्तराखंड को यू ही देव भूमि नही कहा जाता है। यहाँ कण कण मे कोई न कोई देवता निवास करता है। ऐसा ही भगवान शिव के विन्सर स्वरूप को भी कहा जाता है। माना जाता है कि लगभग पर 7 किलोमीटर पर भगवान विन्सर महादेव अपने लिंग स्वरूप मे विधमान है। हालांकि हर स्थान पर क्यों विन्सर महादेव के मंदिर है कोई ऐतिहासिक साक्ष्य तो नही है लेकिन हर एक के बारे मे किवदंतियों मे कुछ न कुछ बाते कही गई है। ऐसे ही एक स्थान जो कि कुलसारी के फयाल दे वर्तमान नाम आलकोट विन्सर के महादेव

तहसील थराली के कुलसारी के निकटवर्ती गॉवों आलकोट, झिनजोली ,भटियाणा ,मैटा मल्ला, तल्ला जिसे पूर्व मे फयाल दे के नाम से जाना जाता था।  यहां स्थित  आलकोट विनसर महादेव को लेकर भवतो मे बड़ी आस्था है। किवदंती है कि आलकोट मे  फयाल जाति के लोग रहते थे । यही से कुछ दूरी पर वे विन्सर पानी की पूजा भी करते थे। लगभग 40 के दशक में यहां उक्त स्थान पर रोज  एक गाय अपना  दूथ आलकोट विनसर पानी महादेव लिंग के उपर चढ़ाती थी । जब ग्वाला शाम को गाय दुहने जाता था तो गाय पर दूध नहीं निकलता था।  ग्वाला परेशान  हो गया  । दूसरे दिन से ग्वाला गाय का पीछा करने लगा और उसने देखा कि गाय सीधे आलकोट में  विनसर पानी स्थित महादेव के लिंग पर अपना दूध  खाली करती थी। कई दिनों तक ग्वाला इसे देखता रहा। एक दिन  फयाल जाति के इस ग्वाले ने गाय को मारने के लिए कुल्हाड़ी निकाली,जैसे ही वार किया कुल्हाड़ी गाय के न इ फट गया, एक ऊंचे स्थान एक विशाल बाज के पेड़ के नीचे आकर जम गया । तब  ग्रामीण लिंग का पीछा करते यहां पहुंचे और लिंग को मखन से जोड़ने लगे। इतने में विनसर महादेव प्रकट हो गये । महादेव विन्सर ने फयाल जाति  को श्राप दिया, धीरे धीरे  यहां फयाल लोगों का विनाश हो गया। अब यहां आलकोट मे फयाल जाति के कोई भी बंशज नही बचे है।
माना जाता है कि तभी से इस क्षेत्र के लोग इस स्थान पर  बिनसर महादेव की सावन के प्रत्येक सोमवार को पूजा अर्चना करते हैं और पवित्र लिंग पर जल चढ़ा महादेव का स्नान करते हैं परंपरा चली आई है। और आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग यहां पहुंच कर भगवान शंकर को के दर्शन करते हैं और उनका जलाभिषेक करते हैं। बहुत ही सुंदर एवं रमणीय स्थान पानी बिनसर महादेव का है। पर्यटन की अपार संभावनाएं हो सकती हैं लेकिन सरकार और शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है । यहां से कुछ दूरी पर  ठुलडांग  गढ़ी एवं राजगढ़ी भी स्थित है यहां से हिमालय का विहंगम दृश्य बहुत ही मनभावन रूप में दिखाई देता है। नंदा घुघुटी, चौखंबा पर्वत श्रृंखला का विहंगम दृश्य बहुत ही सुंदर दिखाई देता है। सरकारों की उपेक्षा के चलते यह क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर नहीं भर पा रहे हैं जिसे लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश एवं निराशा भी है।
 मन्दिर समिति के अध्यक्ष बालक सिंह कंडारी ने बताया की पूर्व विधायक डा जीतराम द्वारा डेढ़ लाख रुपए इस स्थान के सोन्द्रिकर को दिए गए थे। जो पर्याप्त नहीं है।  व्यवस्था नहीं होने के कारण विनसर यात्रा मे परेशानी उठानी पड़  रही है। हालांकि वर्तमान में डोबा झिनजोली सड़क बनने के बाद मन्दिर दूरी 3 किमी पैदल मार्ग से चलना पड़ता है।