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विद्युत वितरण कंपनी के निजीकरण के विरोध में संयुक्त मोर्चा सौपेगा ज्ञापन।
October 4, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

विद्युत वितरण कंपनी के निजीकरण के विरोध में संयुक्त मोर्चा सौपेगा ज्ञापन।                       

बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल

केंद्र सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड बीडिंग डॉक्यूमेंट जोकि विद्युत क्षेत्र की सरकारी कंपनियों खासकर वितरण कंपनियों के निजीकरण का रास्ता साफ करने वाला तानाशाही फरमान है। इस फरमान के खिलाफ प्रदेश के समस्त विद्युत अधिकारी एवं कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों के द्वारा निजी करण विरोधी संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया है जो आज पूरे प्रदेश में एक साथ माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम से एक ज्ञापन सौपेगा। जिसमें मुख्य रूप से विद्युत कंपनियों के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बीडिंग डॉक्यूमेंट को वापस लेने का अनुरोध किया जाएगा और अगर यह बिलिंग डॉक्युमेंट वापस नहीं लिया जाता है तो संयुक्त मोर्चा आगे के आंदोलन के लिए रणनीति बनाकर इसका पुरजोर विरोध करेगा। संयुक्त मोर्चा सभी अधिकारियों कर्मचारियों से आह्वान करता है कि ज्ञापन कार्यक्रम में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाएं। पावर  इंजीनियर एवं इंप्लाइज एसोसिएशन के प्रचार सचिव सुनील सरिआम ने बताया की संयुक्त मोर्चा का गठन विद्युत क्षेत्र को निजीकरण किसे बचाने के लिए किया गया है। विद्युत कंपनियों के निजीकरण होने से उपभोक्ताओं को महंगी विद्युत खरीदनी पड़ेगी। सरकार का कार्य आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाना एवं देश में उपलब्ध संसाधनों को देश के सभी आम नागरिक तक पहुंचाने का है। किंतु निजीकरण करके सरकार देश के चंद पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है जो कि न्याय संगत नहीं है इसके लिए मध्य प्रदेश राज्य विद्युत मंडल के सभी उत्तरवर्ती कंपनी के अधिकारी एवं कर्मचारी निजीकारण रोकने के लिए एक साथ एक मंच पर आकार पुरजोर विरोध करेंगे। निजीकरण होने से रोजगार के अवसर कम होंगे और जनता परेशान होगी। संयुक्त मोर्चा सभी अधिकारी कर्मचारियों से निवेदन करता है कि निजीकरण के विरुद्ध लामबंद होकर अपनी आवाज को बुलंद करें।