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स्वर्गीय प्रणब दा मुखर्जी श्रमिको के भी हितैषी थे।
September 1, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश


बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल

31 अगस्त को अपने भारत के पूर्व राष्ट्रपति, भारतरत्न और देश को 60 वर्षों से दिशा प्रदान करने वाले आदरणीय प्रणब मुखर्जी का कल देहांत हो गया। जिससे मुझे गहरा आघात हुआ है क्योंकि उनके वित्त मंत्री कार्यकाल (1982-84) के समय राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता/ जेबीसीसीआई-3 समझौता को भारत सरकार द्वारा स्वीकृति नहीं दी जा रही थी, तब हमारे एटक यूनियन कोल फेडरेशन के महामंत्री एवं सांसद राज्यसभा कॉमरेड कल्याण राय जी और मुझे  03 नवंबर 1983 को प्रणब मुखर्जी के दिल्ली बंगले पर मिलने का अवसर प्राप्त हुआ था। बातचीत के दौरान मुझे यह महसूस हुआ था कि उनके हृदय में मजदूरों के प्रति काफी जगह है क्योंकि मिलने के एक सप्ताह बाद ही जेबीसीसीआई-3 समझौता कैबिनेट मंत्रालय द्वारा स्वीकृत हो गया था। ऐसे व्यक्तित्व का जाना आज भारत वर्ष के लिए बहुत बड़ी क्षति हुई है। मै अपने एटक कोल फेडरेशन आई.एम. डब्लयू. एफ की तरफ से उन्हें श्रद्धांजली देते हुए इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ हूं।