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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी किसानों के लिए मजाक
September 19, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी किसानों के लिए मजाक
मसनगांव-  जिले के किसान के साथ फिर सरकार ने हास्यपद स्थिती पैदा कर दी है सोयाबिन की फसल खराब होने के वाद विगत 1 वर्षों से बीमा मिलने की राह देख रहे किसानों को अंत में निराशा हाथ लगी है शासन द्वारा जिस प्रकार क्षैत्र के किसानों को बीमा राशि वितरित की गई है उससे किसानों के साथ बड़ा मजाक हुआ है जिस किसान ने ₹780 प्रीमियम जमा करें थे उसे बीमे के रूप में मात्र ₹86 हासिल हुए हैं वहीं उतने ही रकबे मे उसके भाई के खाते में ₹700 तथा तीसरे भाई के खाते में ₹6000 की राशि आई है एक ही हल्के में रहने वाले किसानों को अलग-अलग बीमा राशि दिए जाने से किसान अपने को छला हुआ महसूस कर रहे हैं कई किसानों के खातों में 12 सो रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से राशि डाली गई है तो कहीं पर 2400 किसी को 3000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से राशि प्राप्त हुई है कई किसानों ऐसे भी है जिन्हे सैकड़े में भी राशि प्राप्त नही हुई है वहीं कई किसान बीमा राशि से वंचित भी रहे हैं जिनके  खातों में कोई राशि नहीं आई है। बीमा डलने के पश्चात किसानों की भीड़ बैंक में लगने लगी है जिससे बैंक प्रबंधन को किसानों की बीमे की राशि वता कर तथा उसका समाधान करने मे पसीना छुट रहा है, ।वैसे किसानो के साथ इस प्रकार की मजाक कोई नई वात नही है लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा का क्लेम मिलने के नाम पर किसान हर वर्ष ठगा जा रहा हैं यह दुखदाई है।बीते साल जितने किसानों ने बीमा का प्रीमियम जमा किया था उसमे से कई किसानो को इस बषॅ फसल खराब होने के वाद भी बीमा प्राप्त नही हुआ। क्षेत्र के किसानों के खातों में जिस प्रकार बीमा की राशि डाली गई है उसमें सबसे अधिक राशि रोल गांव के किसानों को प्राप्त हुई है वही सबसे कम राशि कांकरिया ग्राम के किसानों को मिली है जबकि मसन गांव हल्के में 3 गांव आते हैं जहां सभी लोगों का बराबर प्रीमियम काटा गया है इसके बावजूद अलग-अलग राशि मिलने से किसानों में असंतोष बना हुआ है किसानों के साथ यह समस्या है कि वह उसकी समस्या लेकर किस के पास जाये और पुछे कि उसे किस आधार पर यह राशि वितरित की गई है इसकी जानकारी देने के लिए कोई भी अधिकारी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है अधिकांश किसान बैंकों में जाकर शाखा प्रबंधक को अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं। जहां शाखा प्रबंधक जितेश पांडे का कहना है कि इस वर्ष शासन के द्वारा जो राशि किसानों के खातों में डाली गई है वह सीधी आरटीजीएस के माध्यम से निफ्ट की गई है जबकि प्रति वर्ष शासन किसानों को दी जाने वाली राशि को बैंक को सौंपता था जंहा से बैंक के कर्मचारी किसानों के खातों में राशि का वितरण करते थे परंतु इस बार ऐसा ना होकर सीधे शासन के द्वारा यह राशि किसानों के खातों में डाली गई है जिसमे कई अनियमितताएं बनी हुई है।
मसनगांव से अनिल दीपावरे की रिपोर्ट