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पितरों को तर्पण देने से सदैव बरसता है शुभाशीष*  लोगों ने पुरखों को तर्पन देकर उनके  मोक्ष की कामनाएं की गई* 
September 17, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

पितरों को तर्पण देने से सदैव बरसता है शुभाशीष* 
लोगों ने पुरखों को तर्पन देकर उनके  मोक्ष की कामनाएं की गई* 


हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है मान्यता है कि पिंडदान करने से मृतक आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है धर्म शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में पिंडदान करने वाले गृहस्थ दीर्घायु   पुत्र पुत्रादि यस, स्वर्ग, पुष्टि, बल ,लक्ष्मी, पशु, सुख, साधन तथा  धन-धान्य आदि की प्राप्ति करते हैं  यही नहीं पितृ की कृपा से ही उसे समृद्धि  सौभाग्य राज्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है  अश्वनी मास की पितर पक्ष में  पितृ को आशा लगी रहती है कि हमारे पुत्र  पुत्रादि हमें पिंडदान तथा तिलांजलि प्रदान कर संतुष्ट करेंगे  मान्यता है कि पितृ पक्ष के 15-16 दिनों तक पितृ, पितृलोक से धरती पर ही निवास करते है और अमा वस्या के दिन वह पितृ लोक के लिए वापस चले जाते है जब पितृ खुश हो जाते है परिवार मे सुख शांति आ जाती है एवम पूर्वज प्रसन्न रहते है वही गुरुवार को पैतृक तर्पण के लिए जगत जननी मातेश्वरी मां कलेही के चरणों से निकली पतने नदी घाट मे लोगो ने  पित्र मोक्ष अमावस पर अपने पुरखों को तर्पण कर उन्हें याद किया पितरों को  जल और तिल आदि का तर्पण किया वेद शास्त्रों में बताया गया  है कि मनुष्य के लिए जीवन में तीन ऋण चुकाना आवश्यक बताए गए हैं जिनमें देव ऋण  गुरु ऋण एवं पितृ ऋण मुख्य है और इन्हीं ऋणों को चुका कर ही मनुष्य को परम सुख की प्राप्ति होती है 


 पवई से पुष्प लता पटैरिया की रिपोर्ट