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फसल निगरानी दल द्वारा ग्रामों में किया जा रहा है फसलों का सतत् निरीक्षण
October 7, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

होशंगाबाद- फसल निगरानी दल द्वारा ग्रामों में किया जा रहा है फसलों का सतत् निरीक्षण, 07 अक्टूबर,2020 जिले में फसलों कों कीट व्याधि के प्रकोप से बचाव हेतु जिला स्तरीय फसल निगरानी दल द्वारा सतत् निरीक्षण किया जा रहा है। निगरानी दल द्वारा 7 अक्टूबर बुधवार को विकासखण्ड होशंगाबाद के ग्राम निटाया, चंदपुरा, पंवारखेड़ा, व्यावरा व पथोड़ी आदि ग्रामो में फसलो का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण दल में आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र पवारखेड़ा के कृषि वैज्ञानिक डॉ.के.के.मिश्रा, सहायक संचालक कृषि राजीव यादव सहित निगरानी दल के सदस्यगण उपस्थित रहे। निगरानी दल द्वारा भ्रमण के दौरान फसलों के निरीक्षण में फसल की स्थिति बेहतर पायी गई। बताया कि अधिकांशत: धान की फसल दूधिया/परिपक्वता अवस्था की ओर है। कृषि वैज्ञानिक डॉ.मिश्रा द्वारा बताया गया कि धान की फसल में नेक ब्लास्ट अर्थात गर्दन तोड़ नामक बीमारी है जिसमें धान की बालियों के निचले हिस्से में गहरे भूरे रंग के धब्बे बनते हैं और वहीं से बाली मुड़ जाती है तथा संक्रमित बाली सूख जाती है। किसानों को सलाह दी गई कि ऐसी अवस्था में या इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर क्लोरोथयलोनिल 2.5 ग्राम अथवा प्रोपिकोनाजोल 01 मिली लीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। किसानों से कहा गया कि वे इस बात का विशेष ध्यान रखें कि धान की फसल में 02 प्रतिशत से अधिक पौधों में नेक ब्लास्ट की समस्या दिखाई पड़ने पर ही नियंत्रण के उपाय करें जबकि प्रकोप 02 प्रतिशत से कम होने तथा परिपक्वता की ओर वाली धान फसल में भी दवा का छिड़काब न करें। वहीं फाल्स स्मट अर्थात हल्दी गांठ रोग के प्रकोप से इस अवस्था में धान की फसल में कोई आर्थिक क्षति की आशंका नहीं होती है। अत: किसान भाई इसके नियंत्रण हेतु कोई विशेष उपाय न करें। धान का प्रमुख कीट तना छेदक जिससे धान की सफेद व सूखी बालियां निकलती है तथा पौधों को उपर की ओर खीचने पर तना का उपरी भाग आसानी से बाहर निकल आता है जिसके प्रबंधन हेतु फसल की इस अवस्था में किसी भी कीटनाशी औषधि का प्रयोग किया जाना आर्थिक रूप से लाभ नहीं होगा।                                       प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट