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नर्मदा आव्हान सेवा समिति होशंगाबाद द्वारा कोरोना लाकडाउन मे सार्वजनिक कार्यक्रम नही होने के कारण
July 19, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

होशंगाबाद।नर्मदा आव्हान सेवा समिति होशंगाबाद द्वारा कोरोना लाकडाउन मे सार्वजनिक कार्यक्रम नही होने के कारण साहित्यकारो,कवियों को एक मंच पर लाकर उनकी प्रस्तुति के लिए आनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन प्रारंभ किया है जो प्रत्येक रविवार को किया जा रहा है।
       कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि अनिल तेजस्व जतारा,अध्यक्षता सरितावाजपेयी शाहजहांपुर एंव विशिष्ट अतिथि के रुप मे हेमा बुखारिया पृथ्वीपुर की उपस्थिति मे कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ।कवि सम्मेलन दोपहर 3 बजे से निरंतर देर शाम तक चलता रहा। इस अवसर पर आमंत्रित कवियों, कवियत्रियों नेओज,व्यग्ंय,पेरोडी, हास्य एवं करूणा रस की एक से बढ़कर एक रचना प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। श्रोताओं को भाव विभोर करते हुए कवियों ने ताली बजवाने में मजबूर कर दिया।
        रक्षा पुरोहित होशंगाबाद की सुमधुर कोकिलकंठी स्वर के साथ सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।कवि सम्मेलन मे रुद्धपुर के डाँ. जयंत शाह ने कहा कि"तुम्हारी सौतन कोई और नहीं जिसने नींबू की तरह मुझे निचोड़ दी है,प्यार तो तुम्हें आज भी करता हूँ मगर महंगाई ने कमर तोड़ दी है"।गाजियाबाद से स्नेहलता भारती ने कहा कि "आ झुका शीश करलें नमन देश को,तीन रंगों का जिसका ध्वज प्यारा है चाँद सा है धवल सूर्य सा धानी है ,रंग धरा का हरा भी लगे प्यारा है"।
          कवि सम्मेलन को ऊंचाई प्रदान करते हुए पूजा कृष्णा इंदौर ने कहा कि "स्वप्न हुए स्वप्न सजाने रास्ते'पैसा न पास बंद कमाने के रास्ते"।भोपाल की सुनीता यादव ने कहा कि "सावन में पीहर की याद सताती है,सखियाँ और अम्मा सपने में आती है"।होशंगाबाद के जगदीश वाजपेयी बिरही ने वृद्ध बिडम्बना वृद्धावस्था, इकलापन, सूना-सूना सा ये मन सुनाई।भोपाल से सुनीता यादव ने" सावन में पीहर की याद सताती है,सखियाँ और अम्मा सपने में आती है"।
          कवि सम्मेलन का कुशल संचालन करते हुए कोरबा कि अंजना सिंह सोनी ने कहा कि मजदूर के ऊपर कविता मे "हम मजदूर के बच्चे, हम मजदूर है-मजबूर है।ये कैसी मजबूरी पत्थर धूप पर सोते है"।जबलपुर की डाँ. भावना दीक्षित ने कहा कि "प्यार पाया था कभी राहे सफर में इसलिए याद तुमको कर रहे हैं जिंदगी में इसलिए"।दिनेश राज जबलपुर ने कहा कि "मेरी हसरतों को अब तू कोई मक़ाम देदे,महके  मोहब्बतों  से  वो एक शाम देदे"।इसके अलावा राकेश प्रखर भोपाल,अमित दुबे भोपाल,लोटन सिंह होशंगाबाद,पंकज पंण्डित ललितपुर, संध्या सुरभि मुरैना, आरती गोस्वामी देवास ने अपनी प्रस्तुति दी।
      सम्मेलन के अंत मे मुख्य अतिथि अनिल तेजस्व जतारा ने नर्मदा आव्हान सेवा समिति होशंगाबाद को आनलाइन कवि सम्मेलन प्रत्येक हफ्ते आयोजन की बधाई देते हुए कहा कि श्री करैया सक्रिय रुप से साहित्यिक सेवा मे सलग्न है। उनके व्दारा साहित्यिक क्षेत्र मे निरंतर गतिविधिया संचालित होती रहती है।वह बधाई के पात्र है।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि "सबसे पहले अल्हा उदल का में वंदन करता हूं।फिर में छत्रसाल के पौरुष का अभिनंदन करता हूं 
मैया का वरदान मिला है अजर अमर कहलाते है।मैहर में अब भी आकर जो पहला पुष्प चड़ाते है"।          
       विशिष्ट अतिथि हेमा बुखारिया पृथ्वीपुर ने कहा कि नर्मदा आव्हान सेवा समिति एक ऐसा पटल है जो निरन्तर  चाहे नवांकुर हो या बड़े साहित्य कार हो सभी को अपनी प्रतिभा को आगे लाने और साहित्य की सेवा करने का पूर्ण अवसर देता है इस पटल के निर्माता आदरणीय कैप्टन करैया जी दादा बिना किसी स्वार्थ के साहित्य की सेवा में लगे हुए हैं मैं उनका बहुत बहुत आभार करती हूं जिन्होंने मुझे छोटी कलम को इस पटल पर आने का अवसर दिया।
      कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सरिता वाजपेयी शाहजहांपुर ने अपने उदवोधन मे कहा कि करैया जी कई वर्षों से होशंगाबाद  क्षेत्र में साहित्य के प्रसार में संलग्न है, करैया जी ने अल्प समय मे देश मे साहित्य सेवक के रुप मे पहचान बनाई है।इस अवसर उन्होंने कहा कि"सावन की रिमझिम ढंग अजब मकरंद भरी सी ज्यूँ गगरी"।
      इस अवसर पर दिनेश देहाती,संतोष सागर, दिनेश याज्ञनिक, महेश सोनी, सुभाष यादव,एम.के तिवारी, मनोज परसाई, मनोज दुबे, राम सेवक शर्मा, विजय बेर्शम, डाँ प्रेमलता तिवारी,आरती राजेश परसाई,रक्षा पुरोहित, नलिनी तिवारी, निशा डाले,एकता सिंन्हा, रजनी कोठरी सहित सैकड़ों श्रोतागण पटल पर देर शाम तक डटे रहे। 
     अंत में आभार प्रदर्शन समिति के प्रमुख केप्टीन किशोर करैया ने किया।