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कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिको ने किसानो को दी तकनीकी सलाह
October 6, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिको ने किसानो को दी तकनीकी सलाह
होशंगाबाद - 06,अक्टूबर,2020/ कृषि विज्ञान केन्द्र गोविंद नगर के वैज्ञानिको एवं कृषि विभाग के अधिकारियों ने सोहागपुर एवं पिपरिया विकासखण्ड के विभिन्न गांवो का भ्रमण कर किसानो को कीट व्याधि के प्रकोप से बचाव हेतु तकनीकी सलाह प्रदान की। डायग्नोस्टिक टीम ने किसानो को बताया कि जिले में कहीं कहीं धान की फसल में नेक ब्लास्ट एवं हल्दी गांठ नामक बीमारी का प्रकोप देखा जा रहा है। उन्होने किसानो को बताया कि नेक ब्लास्ट (गर्दन तोड़) अनुकूल परिस्थितियों पर जब तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस हो तथा 1 सप्ताह तक आद्र्रता या नमी 90 प्रतिशत से अधिक हो तो यह रोग बहुल अधिक फैल सकता है। बालियां निकलते समय इस रोग से गांठे कमजोर हो जाती है तथा पौधे की बालियां सफेद हो जाती है और इनमें दाने पूरी तरह नहीं बनते है। डायग्नोस्टिक टीम ने किसानो को रोग के प्रबंधन हेतु बताया कि पत्तियों पर बीमारी का एक भी धब्बा दिखाई देने पर कार्बेडाजिम  50 डब्ल्यूपी  250 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड में छिड़काव करें। साथ ही एनपी के मिश्रण 19:19:19 की एक किलो मात्रा प्रति एकड़ व सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें।
डायग्नोस्टिक टीम ने बताया कि उक्त बीमारी के अतिरिक्त धान की फसल में कहीं कहीं फाल्स स्मट (हल्दी गांठ) रोग भी पाया गया है। इस रोग में रोग ग्रस्त दाने पीले अथवा संतरे के रंग के होते है जो बाद में जैतूनी काले रंग के गोले में बदल जाते है। इस रोग के प्रबंधन हेतु किसान फसल काटने के बाद अवशेषो को जला दें। खेतों में अधिक जल भराव न होने दें। रोग के लक्षण दिखाई देने पर फफूंद नाशी टेबूकोनोजोल प्लस ट्राइफ्लोक्सीस्त्रोबिन 100 ग्राम प्रति एकड़ छिड़काव करें। किसान भाई ध्यान रखें कि छिड़काव हेतु प्रति एकड़ 200-250 लीटर पानी का उपयोग करें एवं विभिनन प्रकार के कीटनाशी एवं फफूंदनाशी को एक साथ मिलाकर उपयोग न करें।
प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट