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कृषि वैज्ञानिको की सलाह से‌ किसानों की फसल बचाई जा सकती है कृषि उपसंचालक जितेंद्र सिंह 
August 21, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

कृषि वैज्ञानिको की सलाह से‌ किसानों की फसल बचाई जा सकती है कृषि उपसंचालक जितेंद्र सिंह 
किसान भाइयों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी जा रही सलाह का उपयोग कर फसलों का बचाव करें। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जिले के ग्रामों का सघन भ्रमण कर फसलों का जायजा लिया जा रहा है ।और फसलों की स्थिति को देखते हुए किसानों को फसलों को विभिन्न रोगों से बचाव हेतु समसामयिक सलाह दी जा रही है। उप संचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने जिले के किसानों से कहा है कि वे कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह को अपनाकर  अपनी फसल  को बचाए इसी अनुक्रम में गत दिन जिला स्तरीय  फसल निगरानी दल द्वारा विकासखंड सिवनी मालवा के ग्राम  थुआ, झकलाय, शिवपुर कोलगांव रीती, अर्चनागांव,हमीदपुर, आदि ग्रामो में पहुंचकर फसलों का अवलोकन कर किसानों से चर्चा कर उन्हें समसामयिक सलाह दी गई है।  निरीक्षण दल में आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र पवारखेड़ा के कृषि वैज्ञानिक के. के. मिश्रा,कृषि विज्ञान केंद्र गोविंद नगर बनखेड़ी के कृषि वैज्ञानिक डॉ बृजेश नामदेव, डॉक्टर देवीदास पटेल ,अनुविभागीय अधिकारी कृषि होशंगाबाद राजीव यादव,वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सिवनी मालवा संजय पाठक,ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एच.एस. कुमरे उपस्थित रहे। निरीक्षण प्रांत उपरांत कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कृषक चौपाल लगाकर कृषको को आवश्यक तकनीकी सलाह प्रदान की गई किसानों को बताया गया कि कीट व रोग व्याधि से मुक्त रखने हेतु ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई तथा संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का उपयोग करना नितांत आवश्यक है। वही सोयाबीन फसल में राईजोक्टानिया जो  नामक बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसके नियंत्रण हेतु किसान भाई 2.5 ग्राम काब मार दे कार कार्वे डाजिम नामक दवा का प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर प्रभावित पौधों के पैच के चारों और ट्रेंस करें अर्थात घोल को स्पेयर का नोजल खोल कर भूमि में डालें यदि सोयाबीन की फसल में तना मक्खी का प्रकोप दिखाई दे। तो ऐसी स्थिति में किसान भाई थायोमेंक्साम  नामक दवा आधा ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें सोयाबीन फसल में परण धब्बा रोग का प्रकोप दिखाई देने पर किसान भाई क्लोरो थैलोनील  हेलो नील नाम दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें इस अवसर पर किसानों को फसलों में समनिवत कीट प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों जैसे लाइट ट्रेप  फेरोमेन ट्रैप फसल चक्र 
 अपनाने आदि के बारे में भी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि फसल में किसी भी कीट व्याधि का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर ही कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें ।ऐसा करने से लागत को कम किया जा सकता है ।इस अवसर पर किसानों से कहा गया कि वे कृषि संबंधी समस्या के लिए अपने नजदीकी कृषि केंद्र में निसंकोच संपर्क कर सकते हैं। कहीं कोई दिक्कत परेशानी हो तो इसकी शिकायत सीधे उप संचालक कृषि को उनके कार्यालय के संपर्क   कर त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा सके। 
मनमोहन यादव इटारसी