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इस वर्ष नवरात्रि पर संस्था "संकल्प के द्वारा हिन्दू धर्म जागरण
October 17, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

होशंगाबाद - इस वर्ष नवरात्रि पर संस्था "संकल्प के द्वारा हिन्दू धर्म जागरण व संस्कृति संरक्षण के उदेश्य से विगत 23 वर्षों से माँ भगवति प्रतीमा की स्थापना शिव शांति नगर  में की जा रही हैं। माता की प्रतीमा का निर्माण भोपाल में कोलकता से आए प्रसिद्ध कलाकारों के द्वारा आपने साथ लाई गई मां गंगा की मिट्टी से किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजन का 24वॉ वर्ष हैं। इस वर्ष संस्था "संकल्प" द्वारा वैशविक महामारी कोरोना वायरस के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से " देश का पहला कोरोरा वायरस मुक्त एंव सुरक्षित नवरात्रि पंडाल " का निर्माण किया जा रहा हैं। जिसके अंतर्गत पंडाल में हाथ धोने मास्क का लगाने व्यक्ति से व्यक्ति की दो गज की दूरी,पूरे पंडाल को सेनेटराईज करने की व्यवस्था की जावेगी तथा कोरोना महामारी के प्रति जागरूक करने का कार्य किया जावेगा ऐसी व्यवस्था की जा रही है, इस वर्ष समिति द्वारा आदिशक्ति "बगलामुखी" (पीताम्बरा) के स्वरूप की स्थापना की जायेगी,
देवी का प्रकटयः- देवी का प्राकट्य स्थल गुजरात के सौराष्ट्र क्षत्र में माना जाता है। देश में माता के तीन ही ऐतिहासिक मंदिर हैं। हल्दी रंग के जल से माता का प्रकटय हुआ है हल्दी का रंग पीला होन के कारण माता को पीताम्बरा!। कहते हैं।माता के तीन ऐतिहासिक मंदिर माने जाते हैं,दतिया (म0प्र0) नलखेडा जिला-शाजापुर (म0प्र0),कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में हैं। तीनों का अपना अलग-अलग महत्व हैं। यहाँ देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान करने आते हैं। देवी का स्वरूपः- देवी त्रिनेत्रा हैं मस्तक पर अर्ध घद्र धारण करती है पीले शारीरिक वर्ण युक्त हैं। माता पीले वस्त्र तथा पीले फूलों की माला धारण करती हैं देवी विशेषकर चंपा फूल हल्दी की गाठ की माला धारण करती हैं। देवी ने दैत्य की जिव्हा को पकड़ कर खींच रखा है। जिव्हा पकड़ने का तात्पर्य यह है कि देवी वाक् शक्ति देने और लेने के लिए पूजी जाती हैं। कई स्थानों पर देवी ने मृत शरीर या शव को अपना आसन बनाया हुआ है। उपासना का लाभ- देवी की उपासना शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए की जाती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है। वे चाहे तो शत्रु की जिव्हा ले सकती है और भक्तो की वाणी को दिव्यता का आशीष देती हैं। महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण की प्रेरणा पर अर्जुन ने माँ बगलामुखी की साधना की थी।

प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट