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होशंगाबाद के पूर्व जिला आपूर्ति नियंत्रक पर ₹25000 का जुर्माना।
October 17, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

होशंगाबाद के पूर्व जिला आपूर्ति नियंत्रक पर ₹25000 का जुर्माना।
राज्य सूचना आयोग ने दिया आदेश।

होशंगाबाद-  मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने द्वितीय अपील के एक प्रकरण में आदेश जारी कर होशंगाबाद जिला आपूर्ति नियंत्रक पर  ₹25000 का जुर्माना किया है। अपील क्रमांक ए- 5454/ 2019 के अंतर्गत दिनांक 8अक्टूबर 2020 को  जारीआदेश में लिखा है कि होशंगाबाद जिला आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय में दस्तावेजों के संधारण की स्थिति अत्यंत दयनीय है। सूचना के अधिकार के तहत 30 दिन की समय अवधि में देने योग्य जानकारी के आवेदनों में बनी अनिर्णय की स्थिति में आयोग के समक्ष प्रस्तुत  इस अपील प्रकरण में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी के कथन विभाग में  अधिकारियों की स्वेच्छा चारिता के दर्शन कराने वाले हैं। आयोग उनके उत्तर से सहमत नहीं है उन्हें अधिकतम शास्ति का पात्र मानता है। यह आयोग अभिलेखों का अवलोकन एवं तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी विनोद चौहान को सुनने के बाद उन पर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत राशि 25000 हजार शास्ति अधिरोपित करता है। विनोद चौहान की शास्ति की राशि मध्य प्रदेश सूचना का अधिकार (फीस तथा अपील) नियम 2006 के नियम8(6)(क) तहत आयोग कार्यालय में जमा करते हुए इसकी सूचना आयोग को उपलब्ध कराएंगे अन्यथा की स्थिति में नियम 8(6)(दो) 8(6)(तीन)एवं8(6)(चार )के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार एम आर रसिक खान होशंगाबाद ने 24 जून 2019 को जिला आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय में आवश्यक जानकारी प्राप्त करने हेतु सूचना के अधिकार के अंतर्गत एक आवेदन प्रस्तुत किया था। जानकारी अप्राप्त की स्थिति में आवेदक ने प्रथम अपील अधिकारी एवं अपर कलेक्टर होशंगाबाद के समक्ष 13/ 8/ 2019 को प्रथम अपील प्रस्तुत की थी। दिनांक 05/09/2019को प्रथम अपील अधिकारी ने अपील  का निराकरण करते हुए आवेदक को जानकारी निशुल्क देने के आदेश दिए थे लेकिन लोक सूचना अधिकारी जिला आपूर्ति नियंत्रक द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर आवेदक द्वारा राज सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई थी।
मामले की सुनवाई के अंतर्गत 8 अक्टूबर 2020 को राज्य सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी द्वारा अपील का निराकरण करते हुए तत्कालीन जिला आपूर्ति नियंत्रक विनोद चौहान पर ₹25000 की शास्ति अधिरोपित की गई। आयोग ने अपने आदेश में लिखा है कि यदि शास्ति की राशि जमा नहीं की जाती है तो उनकी सेवा पुस्तिका में राशि की टीप दर्ज करें ताकि सेवा अवधि में उनसे राशि वसूल न हो सके तो सेवा उपरांत अंतिम देयकों से काटकर उनकी राशि कोषालय में जमा कराई जा सके।                     प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट