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बीमार है पिंडर की स्वास्थ्य सेव
September 26, 2020 • Aankhen crime par • उत्तराखंड

बीमार है पिंडर की स्वास्थ्य सेव

जनपद चमोली से केशर सिंह नेगी की रिपोर्ट 

 


 उत्तराखंड में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं का की दशा बुरी तरह प्रभावित है। स्वास्थ्य सेवाएं इस कदर बीमार हैं कि यहां पर चिकित्सकों के अभाव में आए दिन बीमार लोगों के सामने समस्याएं देखने को मिली है । सरकार भी चिकित्सकों के अभाव  जनपद चमोली के अति दूरस्थ क्षेत्र पिंडर घाटी की स्वस्थ सेवाओं पर कुछ नही कर पा रही है। तीन तहसीलों की इस  घाटी में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार की व्यवस्थाएं कुछ इस प्रकार हैं कि तहसील मुख्यालय थराली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्थापित किया गया है। चिकित्सा व्यवस्थाओं की स्थिति बीमार है।  नियमानुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद हैं। जिसके सापेक्ष यहां पर कोई भी विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात नही है।  जो भी मरिज यहां पर आता है तो उसे रेफर कर दिया जाता है।  पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जूझ रहा है।  एक्स रे टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, स्टाफ नर्स सहित अनेकों पैरामेडिकल स्टाफ के पद वर्षों से रिक्त चल रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आधुनिक एक्स रे मशीन तो लगी है, लेकिन लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में यहां पर मरीज का ना तो एक एक्सरे हो पाता है और नहीं अल्ट्रासाउंड ही हो पाता है। यदि मरीज का एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड किया जाना है तो उसे 50 किलोमीटर दूर कर्णप्रयाग तक जाना होगा। यही स्थिति  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल की भी है । 60 ग्राम पंचायतों के विकास खंड देवाल में विकासखंड मुख्यालय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया है। लेकिन यहां पर भी कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। अब जंगली जानवर भालू मनुष्य को घायल करे या घास लेने गई कोई महिला गिर जाए तो उसे इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल से रेफर कर दिया जाता है। यहां पर भी विशेषज्ञ डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ का नितांत अभाव है । क्षेत्र के लोग बमुश्किल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं लेकिन उन्हें यहां से रेफर कर दिया जाता है।यही स्थिति तहसील नारायण बगड़ की भी है। यहां पर भी तहसील मुख्यालय होने के बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं बन पाया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी एवं पैरामेडिकल स्टाफ का अभाव है। लोगों को छोटी मोटी बीमारी के इलाज के लिए भी शहरों की ओर जाना होता है। चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में लोग पलायन कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि इस ओर भी ध्यान दें।