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बन्दी दुर्लभ केमेलियन को आदिल ने आज़ाद करवाया, उपचार के बाद जंगल में छोड़ा
September 28, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

बन्दी दुर्लभ केमेलियन को आदिल ने आज़ाद करवाया, उपचार के बाद जंगल में छोड़ा

बैतूल/सारनी। कैलाश पाटिल

शनिवार दोपहर में वन्य प्राणियों व पर्यावरण के संरक्षण का कार्य करने वाले पर्यावरणविद आदिल खान को सूचना मिली की सारनी के पास बाकुड़ गांव में एक हरे रंग का गिरगिट मिला है।
जिस पर आदिल ने वन विभाग को सूचित किया और बाकुड़ गांव पहुंचे। गांव के एक युवक ने गिरगिट को बंदी बना रखा था, गिरगिट की दुम टूटी हुई थी और उसे रस्सी से बांध रखा था, युवक उसे पालने की जिद पर अड़ा था।
जिस पर मेनका संजय गांधी के संगठन पीपल फॉर एनिमल्स‍, यूनिट सारनी के अध्यक्ष आदिल खान ने युवक को समझाइश देते हुए बताया कि यह इंडियन केमेलियन है। वन्य प्राणी अधिनियम 1972 के अंतर्गत इसे पालना गैरकानूनी है। यह एक वन्य जीव है और जंगल ही इसका घर है । आदिल ने युवक को समझाया की यह घायल अवस्था में है जिस वजह से इसको प्राथमिक उपचार देना आवश्यक है अन्यथा इसकी मृत्यु भी हो सकती है। गांव के जागरूक युवा कृष्णकांत नागवंशी व मनोज नागवंशी द्वारा भी युवक को समझाइश दी गई । जिसके बाद युवक ने केमेलियन आदिल के सुपुर्द कर दिया।
केमेलियन का रेस्क्यू करने के बाद आदिल खान ने सारनी रेंजर विजय बारस्कर को संपूर्ण मामले की जानकारी दी, उसके बाद वन‌ विभाग की देखरेख में इंडियन केमेलियन को प्राथमिक उपचार दिया गया और शाम को आदिल ने केमेलियन के लिए उपयुक्त स्थान ढूंढ कर सतपुड़ा के घने जंगलों में उसे छोड़ दिया। आदिल ने बताया कि केमेलियन हरे रंग के बड़े गिरगिट होते हैं जो घने जंगलों में रहते हैं और जरूरत के हिसाब से रंग बदलने में माहिर होते हैं। इनके शरीर की बनावट अन्य आम गिरगिटों से अलग होती है, इनकी बड़ी जीभ होती हैं जिसकी मदद से ये अपने से थोड़ी दूरी पर बैठे किडो़ का शिकार करते हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसकी आंखें सामान्य जीवों से बिल्कुल अलग हैं, इसकी दोनों आंखे अलग-अलग ऐंगल पर 360 डिग्री तक घूम सकती हैं। यानि यह एक आंख से आगे और एक आंख से पीछे की ओर देख सकता है। ये बेहद शांत होते हैं, पेड़-पौधों व झाड़ियों में रहते हैं । इंडियन केमेलियन अपने आप को जंगलों में आसानी से छुपा लेते हैं, इस वजह से सतपुड़ा के जंगलों में यह जीव बहुत मुश्किल से ही दिखाई देते हैं।