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अभिभावक कल्याण संघ के जिला अध्यक्ष दशरथ चौधरी के साथ मिलकर
September 16, 2020 • Aankhen crime par • मध्यप्रदेश

होशंगाबाद - आज एक ज्ञापन दिया जिसमें कहा कि जिले के समस्त प्रायवेट स्कूलों द्वारा अवैध रूप से ट्यूशन फीस में की जा रही वृध्दि यक्ष को बंद किए जाने तथा स्कूलों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के नियमों की अवहेलना की जा रही है, एवं दिनांक 23 मार्च 2020 से कोरोना जैसी महामारी से लॉक-डाउन के कारण लगभग पांच माह तकरीबन साल का आधा समय व्यापार और नौकरी पूरी तरह से बंद है जिसके कारण आम आदमी पर आर्थिक बोझ का दवाब बहुत है। व्यापक तरीके से पड़ा, आम इंसान अपने बच्चो की स्कूल की अवैध रूप से बढती हुई फीस देने में बहुत ज्यादा पीड़ा में है आज हमारे राष्ट्र ने हर घर में एक अभिभावक है इसके पश्चात भी हमारें देश के भविष्य के पालन हार माता-पिता उर्फ अभिभावकों की आवाज नही सुनी जा रही है आपका ध्यान केन्द्रित करते हुए कुछ बिन्दु निम्नलिखित प्रस्तुत है ,
1: शिक्षा अधिनियम 2009 के अधिकार से 6 साल से 14 साल यानि कक्षा 8 वी तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाना उनका मौलिक अधिकार है व स्कूलों को भी कक्षा 8 वी तक के बच्चों को पढ़ाना अनिवार्य है। परन्तु इस कानून का उल्लंघन करते हुए होशंगाबाद जिले के समस्त प्रायवेट स्कूल अगर कोई अभिभावक स्कूल की फीस देने में अमसर्थ है तो उनके बच्चों को स्कूल से नाम काटने की धमकियाँ दी जा रही है व ऑनलाइन क्लासेस के ग्रुप से निकाला जा रहा है। जिससे कि एक मजबूर अभिभावक प्रताडित हो रहा है माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेशों का सरासर उल्लंघन है । क्योकि आप सक्षम अधिकारी है तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन कराने के बाध्यकारी भी है और इस दशा में अगर आपके द्वारा अपने कर्तव्यों की पूर्ति नही की जाती है। प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट