रिपोर्ट केशर सिंह नेगी थराली
कोरोना काल मे महानगरों में काम कर रहे पहाड़ के सैकड़ों लोग बेरोजगार हुए और लाखों लोग पहाड़ वापस लौट आए। एक ओर जहां घर लौटने के बाद प्रवासियों के सामने रोजगार का संकट है वहीं दूसरी ओर थराली ब्लॉक के रूईसाण गांव के दो भाइयों ने न सिर्फ अपने लिए रोजगार ढूंढा बल्कि दूसरों को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
थराली के मनोज राणा और विनोद राणा ने अपनी जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बना लिया है। बड़ा भाई मनोज राणा ऑर्गेनिक फार्मिंग कर रहा है तो छोटा भाई विनोद राणा कैफ़े चलाता है। दोनों भाई इलाके के लोगों को उम्मीद की राह दिखा रहे हैं। मनोज राणा पिछले 17 साल से दिल्ली में एक कंपनी में जॉब कर रहे थे वहीं विनोद राणा होटल में शेफ़ थे। जब कोरोना लॉकडाउन में नौकरी चली गई तो दोनों भाई गांव आ गए। काफी दिन खाली रहने के बाद दोनों भाइयों ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा दिए। छोटा भाई विनोद राणा कुलसारी में "पहाड़ी रोवर्स कैफ़े' चलाता है जिसमें उन्होंने अपने साथ 2 अन्य युवाओं को काम पर रखा है। कैफ़े में वे विशिष्ट प्रकार के व्यंजन बनाते हैं। बड़ा भाई मनोज राणा गाँव में ऑर्गेनिक फार्मिंग का काम करता है। उन्होंने हिमांचली सेब, बादाम, अखरोट, आडू, खुमानी जैसे फलदार पेडों की पौध लगाई है, साथ ही मेडिसिन प्लांट जैसे दालचीनी, कटुकी आदि की पौध भी लगाई है। अपने फार्म में वे प्रतिदिन खूब मेहनत करते हैं। ऑर्गेनिक फार्मिंग के साथ साथ मनोज राणा ट्रैकिंग गाइड का काम भी करते हैं, वे टूरिस्ट को ब्रह्मताल, वेदनी बुग्याल, झलताल सुप्ताल आदि रमणीक स्थानों की ट्रैकिंग पर ले जाते हैं। दोनों भाई स्वरोजगार अपनाने से खुश हैं और दूसरों की मदद के लिए भी तैयार हैं। मनोज राणा का कहना है वे ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देना चाहते हैं। वे चाहते हैं पहाड़ के युवा पलायन करने के बजाय गाँव में रहकर ही स्वरोजगार अपनाएं।